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Friday May 10, 2024
Aryavart Times

कार्बन प्रचुरता वाले तारे अपने से कम द्रव्यमान वाले तारों से चुराते हैं भारी तत्व

कार्बन प्रचुरता वाले तारे अपने से कम द्रव्यमान वाले तारों से चुराते हैं भारी तत्व

वैज्ञानिक लंबे समय से इस विषय को लेकर उत्सुक रहे हैं कि कार्बन की प्रचुरता वाले सितारों पर लोहे की तुलना में भारी तत्वों की उपलब्धता की बहुत अधिक संभावना है। भारतीय खगोलविदों के एक नए शोध में इस बात का पता चल है कि तारे अपने से कम द्रव्यमान वाले तारों यानि अपने से छोटे तारों की सतह के कई महत्वपूर्ण और भारी तत्वों को आकर्षित कर अपने में मिला लेते हैं। 
यह सत्य है कि ब्रह्मांड में कई रासायनिक तत्वों और उनके समस्थानिकों की उत्पत्ति और विकास को समझने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, परंतु ब्रह्मांड में भारी तत्वों, यानी लोहे से भारी तत्वों की उत्पत्ति और विकास को स्पष्ट रूप से अभी समझा नहीं जा सका है।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बेंगलुरु के खगोलविदों के एक समूह नेकई कार्बन एन्हांस्ड मेटल-पुअर (सीईएमपी) सितारों की सतह की रासायनिक संरचना का विश्लेषण किया और इस पहेली को सुलझाने में एक महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। इसका नेतृत्व प्रोफेसर अरुणा गोस्वामी ने किया और इस दल में उनके डॉक्टरेट छात्रों मीनाक्षी पी और शेजीलम्मल जे भी शामिल थीं ।  यह कार्य हाल ही में 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल' में प्रकाशित हुआ है।
सीईएमपी तारों को विविध प्रकार के भारी तत्वों के बहुतायत पैटर्न की विशेषता के आधार पर और मुख्य रूप से चार समूहों में वर्गीकृत किया जाता है, जिसके आधार पर भारी तत्वों के समूह प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये ज्यादातर क्षुद्र तारे, उप-विशाल तारे या विशाल तारे हैं, और जो तारे इन उत्पत्ति के चरणों से संबंधित हैं, वे लोहे से भारी तत्वों का उत्पादन नहीं कर सकते हैं।
उत्पत्ति के चरणों में जिसमें तारों का अस्तित्व मौजूद है, उनसे भारी तत्वों के उत्पादन की उम्मीद नहीं की जाती है। हालांकि, इन तारों की सतह की रासायनिक संरचना में भारी तत्वों की प्रचुरता दिखाई देती है जो सूर्य की तुलना में लगभग 100 से 1000 गुना अधिक बड़े हैं। प्रो गोस्वामी ने बताया कि हमने भारी तत्वों की बहुतायत की उत्पत्ति का अध्ययन किया और हमें सतह पर रसायनों के प्रचुरता में मौजूद होने के संभावित संकेत प्राप्त हुए।
इस गुत्थी को सुलझाने में शोधकर्ताओं के इस दल ने इंडियन एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी, हानले में 2-M हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT), चिली के ला सिला में यूरोपीय दक्षिणी ऑब्जर्वेटरी में 1.52-M टेलीस्कोप और जापान के राष्ट्रीय खगोलीय वेधशाला द्वारा संचालित मौनाके, हवाई के शिखर पर 8.2-एम सुबारू टेलीस्कोप से प्राप्त किए गए सितारों के उच्च गुणवत्ता, उच्च-रिज़ॉल्यूशन स्पेक्ट्रा का विश्लेषण किया।  
उन्होंने अपने अध्ययन में कार्बन, मैग्नीशियम, स्ट्रोंटियम, बेरियम, यूरोपियम, लैंथेनम आदि जैसे कुछ प्रमुख तत्वों के मौलिक बहुतायत अनुपात का उपयोग किया जिससे कुछ महत्वपूर्ण संकेत इस बात के मिले हैं कि किस तरह से इन तत्वों की अधिकता बढ़ती है।
एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में हाल ही में प्रकाशित दो शोध पत्रों में उन्होंने दिखाया है कि सीईएमपी सितारों पर देखे गए बढ़े हुए भारी तत्व वास्तव में उनके कम-द्रव्यमान वाले तारों से विकास के एक चरण में उत्पन्न होते हैं जिसे एसिम्प्टोटिक जाइंट ब्रांच (एजीबी) कहा जाता है और स्थानांतरित कर दिया जाता है। विभिन्न मास ट्रांसफर मैकेनिज्म के माध्यम से सीईएमपी सितारों को उत्पाद। कम द्रव्यमान वाले एक जैसे तारे आगे क्षुद्र तारों के रूप में विकसित हुए हैं जिनका पता नहीं लग पाता है। वैज्ञानिकों ने वर्गीकरण योजनाओं के एक सेट को नियोजित किया और यह जांचने के लिए स्पेक्ट्रोस्कोपिक तकनीकों का उपयोग किया कि क्या तारे रेडियल वेग में परिवर्तनशीलता दिखाते हैं और पाया कि अधिकांश तारे वास्तव में बायनेरिज़ हैं।
शीजीलम्माल और मीनाक्षी ने बताया कि विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि कम द्रव्यमान वाले एक जैसे तारे कम धातु के भी होते हैं।







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